ईरान के सर्वोच्च नेता खामेनेई की मौत पर भारत की चुप्पी पर उठे सवाल, विपक्ष ने सरकार से मांगा जवाब
नई दिल्ली: ईरान के सर्वोच्च नेता Ayatollah Ali Khamenei की 28 फरवरी 2026 को हुई मौत के बाद भारत की आधिकारिक प्रतिक्रिया को लेकर देश की राजनीति में बहस तेज हो गई है। विपक्षी दलों का आरोप है कि भारत सरकार ने इस घटना पर अब तक स्पष्ट रुख नहीं अपनाया है और संसद में भी कोई शोक प्रस्ताव पेश नहीं किया गया।
कई राजनीतिक नेताओं का कहना है कि सरकार की चुप्पी कई सवाल खड़े करती है, खासकर तब जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस घटना को लेकर चर्चा जारी है।
अमेरिका-इजरायल हमले की खबरों के बाद बढ़ा विवाद
रिपोर्ट्स के मुताबिक, 28 फरवरी को ईरान में हुए एक बड़े सैन्य हमले में अमेरिका और इजरायल की भूमिका की चर्चा सामने आई, जिसमें खामेनेई की मौत की खबर आई। इस घटना के बाद मध्य-पूर्व की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है।
हालांकि भारत सरकार की ओर से अब तक इस मामले पर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, जिस पर विपक्ष सवाल उठा रहा है।
2024 में इब्राहिम रईसी की मौत पर भारत ने किया था राजकीय शोक
इस मामले में तुलना मई 2024 की घटना से की जा रही है, जब ईरान के तत्कालीन राष्ट्रपति Ebrahim Raisi की हेलीकॉप्टर दुर्घटना में मौत हो गई थी।
उस समय भारत सरकार ने 21 मई 2024 को एक दिन का राजकीय शोक घोषित किया था। इसके अलावा संसद के सत्र की शुरुआत में शोक प्रस्ताव भी रखा गया था।
इसी वजह से अब सवाल उठ रहे हैं कि इस बार सरकार की प्रतिक्रिया अलग क्यों दिखाई दे रही है।
BRICS+ से भी जुड़ा है मामला
विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला इसलिए भी अहम है क्योंकि ईरान BRICS के विस्तारित मंच BRICS+ का हिस्सा है। इस साल इस मंच की अध्यक्षता भारत के पास है, इसलिए भारत की प्रतिक्रिया को वैश्विक स्तर पर भी देखा जा रहा है।
भारत की कूटनीतिक चुनौती
विदेश नीति विशेषज्ञों के अनुसार भारत को इस मामले में संतुलन बनाए रखना पड़ सकता है, क्योंकि भारत के अमेरिका, इजरायल और ईरान—तीनों देशों के साथ अलग-अलग रणनीतिक और आर्थिक संबंध हैं। ऐसे में सरकार किसी भी बयान से पहले स्थिति का आकलन कर रही हो सकती है।
Iran Supreme Leader News 2026, Ayatollah Khamenei Death News, Iran Israel Conflict, India Foreign Policy Iran, BRICS Iran News, Middle East Crisis 2026

